पडी कुछ इस तरह सर्दी
बताये हाल हम कल का
रुइ से बादलों की रजाई मे
सूर्य जा दुबका
हो गया सर्द था मौसम
बढ गई इस कदर ठिठुरन
रजाई से न वो निकला
रजाई से न निकले हम
दुख की तुम गाथा सुनाते
-
दुख की तुम गाथा सुनातेदो दिनों के बीच में इक रात आती रात का तुम ज़िक्र
करते दिन तुम्हारे पास था दिन कभी गाया नहीं !दो सुखों के बीच था इक दुख
पिरोया दुख की ...
1 दिन पहले
सुन्दर प्रस्तुति
जवाब देंहटाएं