सपनो के सौदागर से
बहुत जिन्दाबादी के नारे सुने,
अब असली मुद्दों पे आओ जरा
करेंगे ये हम और करेंगे वो हम,
हमें कुछ तो कर के दिखाओ जरा
ये जनता दुखी है,परेशान है,
उसे थोड़ी राहत दिलाओ जरा
ये सुरसा सी बढती चली जारही ,
इस मंहगाई को तुम घटाओ जरा
भाषण से तो पेट भरता नहीं,
खाना मयस्सर कराओ जरा
खरचते थे सौ ,मिलते पंद्रह थे,
नन्यान्वे अब दिलाओ जरा
गरीबों के घर खाली रोटी बहुत,
गरीबों को रोटी खिलाओ जरा
मदन मोहन बाहेती 'घोटू'
अनुकम्पा नियुक्ति सदैव स्थायी-इलाहाबाद हाईकोर्ट
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि मृतक
आश्रित कोटे (अनुकम्पा नियुक्ति) के तहत मिलने वाली सरकारी नौकरी हमेशा स्थायी
औ...
3 दिन पहले
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