परेशानी-गर्मी की
गर्मियों में इस कदर ,मुश्किल है जीना हो गया
हवायें लू बन गयी, पानी पसीना हो गया
और डर ने पसीने के,हाल है एसा किया
पास भी अब पटखने में,बिदकती है बीबियाँ
बड़ी मनमौजी हुई है, आती जाती रात दिन
अंखमिचौली खेलती ,बिजली सताती रात दिन
आजकल उतनी हंसीं ,लगती नहीं है हसीना
चेहरे का मेकअप बिगाड़े,गाल पर बह पसीना
कम से कम कपडे बदन पर,जिस्म खुल दिखने लगे
उनको भी ये सुहाता है,हमको भी अच्छा लगे
गरमियों के दरमियाँ बस फलों का आराम है
लीचियां है,जामुने है,चूंसने को आम है
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
Vishnu Puran - Part 001
-
Vishnu Puran - Part 001A Beautiful Journey into Creation and Divine Love:
Reflections on the Vishnu PuranaWelcome back, dear friends! Today, we are
starti...
13 घंटे पहले
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
कृपया अपने बहुमूल्य टिप्पणी के माध्यम से उत्साहवर्धन एवं मार्गदर्शन करें ।
"काव्य का संसार" की ओर से अग्रिम धन्यवाद ।