गुस्सा या शृंगार
(घोटू के छक्के )
पत्नी अपनी थी तनी,उसे मनाने यार
हमने उनसे कह दिया,गलती से एक बार
गलती से एक बार,लगे है हमको प्यारा
गुस्से में दूना निखरे है रूप तुम्हारा
कह तो दिया,मगर अब घोटू कवी रोवे है
बात बात पर वो जालिम गुस्सा होवे है
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
आदमी
-
आदमी कली क्या करती है फूल बनने के लिएविशालकाय हाथी ने क्या कियानिज आकार
हेतुव्हेल तैरती है जल में टनों भार लिएवृक्ष छूने लगते हैं गगन अनायासआदमी
क्यों बौना...
1 घंटे पहले
शानदार तरीका है मनाने का | बधाई स्वीकारें |
जवाब देंहटाएंगुस्सा क्यूँ दिलाया ...
जवाब देंहटाएंबहुत बढ़िया नोक-झोंक ....