मिलन संगीत
होठों से निकल साँसे ,जब,
बांसुरी के अंतर्मन से गुजरती है,
और तन के छिद्रों पर,
उंगलियाँ संचालन करती है
तो मुरली की मधुर तान गूंजने लगती है
तबले और ढोलक की,
कसी हुई चमड़ी पर,
हाथ और उंगलियाँ,
थाप जब देतें है,
तो फिर' तक धिन धिन' की,
स्वरलहरी निकलती है
सितार के कसे हुए तारों को,
जब उंगुलियां हलके से,
स्पर्श कर ,छेड़ती है,
तो सितार के मधुर स्वर,झंकृत हो जाते है
पीतल के मंजीरे,
जब आपस में दोनों ,मिल कर टकराते है
खनक खनक जाते है
मिलन की बेला में,
गरम गरम साँसे,
उद्वेलित होकर के,
रोम रोम में तन के,
मधुर तान भरती है
स्वर्णिम तन की त्वचा पर,
हाथ और उंगलियाँ,जब जब थिरकती है
मन के तार तार,
जब पाकर प्यार,
उँगलियों की छुवन से,झंकृत हो जाते है
मिलन के उन्माद में,
मंजीरे की तरह,
जब तन से तन टकराते है
ये साज सब के सब,
एक साथ मिल कर जब,
लगते है बजने तो,
जीवन में मिलन का मधुर संगीत,
गुंजायमान हो जाता है
मदन मोहन बाहेती'घोटू'
Vishnu Puran - Part 001
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Vishnu Puran - Part 001A Beautiful Journey into Creation and Divine Love:
Reflections on the Vishnu PuranaWelcome back, dear friends! Today, we are
starti...
15 घंटे पहले
मिलन की भावना का बहुत सुन्दर शब्द-चित्रण!...आभार!
जवाब देंहटाएंसुन्दर पंक्तियाँ भावों का सम्मोहन |
जवाब देंहटाएंdhanywad
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