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मेरा काव्य-पिटारा
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बुधवार, 26 मार्च 2025
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गुलाब की पंखुड़ी सुंदर गुलाब की तू पंखुड़ी तेरा स्पर्श मुलायम है तुझसे खुशबू उमड़ी उमड़ी मखमली गुलाबी रंगत है,तू है गोरी के अधर चढ़ी तू ...
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चाहत तुम्हें लौकी पसंद है तो पकाओ और खाओ तुम मैं हूं पकवान का प्रेमी, मुझे हलवा खिलाओ तुम पसंद हर एक इंसान की, होती अपनी-अपनी है, पसंद तुम ...
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किस्मत नहीं कुछ हाथ लगना है तो गम खाने से क्या होगा जहां ना दाल गलनी है, वहां जाने से क्या होगा यही वह सोच है जो रोकती है हमको पाने से, चु...
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असर जीतता ट्रंफ यू एस ए,मेरे शेयर लुढ़क जाते रूस यूक्रेन लड़ते तो भाव सोने की बढ़ जाते मेरे खाने में मिर्ची और नमक अनुपात बढ़ जाता, हमारा...
मंगलवार, 25 मार्च 2025
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कभी साबुन की बट्टी था, भरा खुशबू से जीवट मैं घिसा तुमको सजाने में ,रह गया एक चीपट मै काम आऊंगा मैं अंत तक, रखोगे चिपका जो मुझको, अकेला छोड...
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