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शुक्रवार, 9 नवंबर 2018

Archive for May, 2014
रस के तीन लोभी
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   रस के तीन लोभी 
            भ्रमर 
गुंजन करता ,प्रेमगीत मैं  गाया करता  
खिलते पुष्पों ,आसपास ,मंडराया करता 
गोपी है हर पुष्प,कृष्ण हूँ श्याम वर्ण मैं 
सबके संग ,हिलमिल कर रास रचाया करता 
मैं हूँ रस का लोभी,महक मुझे है प्यारी ,
मधुर मधु पीता  हूँ,मधुप कहाया  करता 
                
                   तितली  
फूलों जैसी नाजुक,सुन्दर ,रंग भरी हूँ 
बगिया में मंडराया करती,मैं पगली हूँ 
रंगबिरंगी ,प्यारी,खुशबू मुझे सुहाती 
ऐसा लगता ,मैं भी फूलों की  पंखुड़ी  हूँ 
वो भी कोमल ,मैं भी कोमल ,एक वर्ण हम,
मैं पुष्पों की मित्र ,सखी हूँ,मैं तितली हूँ 
               
             मधुमख्खी 
भँवरे ,तितली सुना रहे थे ,अपनी अपनी 
प्रीत पुष्प और कलियों से किसको है कितनी 
पर मधुमख्खी ,बैठ पुष्प पर,मधु रस पीती ,
 मधुकोषों में भरती ,भर सकती वो जितनी 
मुरझाएंगे पुष्प ,उड़ेंगे तितली ,भँवरे ,
संचित पुष्पों की यादें है मधु में कितनी

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

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  May 31, 2014   ghotoo    Leave a comment
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देखो ये कैसा जीवन है
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     देखो ये कैसा जीवन है

गरम तवे पर छींटा जल का 
जैसे  उछला उछला  करता
फिर अस्तित्वहीन हो जाता, 
बस  मेहमान चंद  ही पल का  
जाने कहाँ किधर खो जाता ,
सबका ही वैसा जीवन है 
देखो ये कैसा जीवन है 
मोटी सिल्ली ठोस बरफ की 
लोहे के रन्दे  से घिसती 
चूर चूर हो जाती लेकिन,
फिर बंध सकती है गोले सी 
खट्टा  मीठा शरबत डालो,
चुस्की ले, खुश होता मन है 
देखो ये कैसा जीवन  है 
होती भोर निकलता सूरज 
पंछी संग मिल करते कलरव 
होती व्याप्त शांति डालों  पर,
नीड छोड़ पंछी उड़ते  जब 
नीड देह का ,पिंजरा जैसा,
और कलरव ,दिल की धड़कन है 
देखो ये कैसा जीवन है

मदन मोहन बाहेती 'घोटू' 

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 May 31, 2014   ghotoo    Leave a comment
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ग़ज़ल
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            ग़ज़ल

जो कमीने है,कमीने ही रहेंगे 
दूसरों का चैन ,छीने ही रहेंगे 
कुढ़ते ,औरों की ख़ुशी जो देख उनको,
जलन से आते पसीने ही रहेंगे 
कोई पत्थर समझ कर के फेंक भी दे,
पर नगीने तो नगीने ही रहेंगे 
 आस्था है मन में तो ,काशी है काशी ,
और मदीने तो मदीने ही रहेंगे 
उनमे जब तक ,कुछ कशिश,कुछ बात है ,
हुस्नवाले लगते सीने ही रहेंगे 
 अब तो भँवरे ,तितलियों में ठन गयी है,
कौन रस फूलों का पीने ही रहेंगे 
जितना भी ले सकते हो ले लो मज़ा ,
आम मीठे,थोड़े महीने ही रहेंगे

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

 May 28, 2014   ghotoo    Leave a comment
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कुर्सी
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           कुर्सी

कुर्सियों पर आदमी चढ़ता नहीं है ,
                 कुर्सियां चढ़ बोलती दिमाग पर 
भाई बहन,ताऊ चाचा ,मित्र सारे,
                 रिश्ते नाते ,सभी रखता  ताक पर  
गर्व से करता तिरस्कृत वो सभी को ,
                  बैठने देता न मख्खी   नाक पर 
भूत कुर्सी का चढ़ा है जब उतरता ,
                  आ जाता है अपनी वोऔकात पर     

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

 May 27, 2014   ghotoo    Leave a comment
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सलाह
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           सलाह 
एक दिन हमारे मित्र  बड़े परेशान थे 
क्या करें,क्या ना करें,शंशोपज में थे, हैरान थे 
हमने उनसे कहा ,सलाह देनेवाले बहुत मिलेंगे,
मगर आप अपने को इस तरह साँचें में ढाल  दें 
जो बात समझ में न आये ,उसे एक कान से सुनकर,
दूसरे कान से निकाल दें 
आप सबकी सुनते रहें 
मगर करें वही ,जो आपका दिल  कहे
लगता है उन्होंने मेरी बात पर अमल कर लिया है 
मेरी सलाह को इस कान से सुन कर,
उस कान से निकाल दिया है

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

 May 25, 2014   ghotoo    Leave a comment
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अच्छे दिन आने लगे है
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      अच्छे दिन आने लगे है

वो भी दिन थे ,जब दस जनपथ,
                      कहता सूर्य उगा करता था 
जब बगुला भी राजहंस बन,
                     मोती सिर्फ चुगा करता था 
'मौन'बना कुर्सी की शोभा ,
                      कठपुतली बन नाचा करता,
जब तक 'टोल टैक्स'ना भर दो,
                       सारा काम  रुका था करता   
चोरबाजारी ,बेईमानी ,
                          घोटालों की चल पहल थी  
 चमचे  और चाटुकारों की,
                           सभी तरफ होती हलचल थी 
देखो मौसम बदल रहा है,
                        अब अच्छे दिन आने को है 
प्रगतिशील,कर्मठ मोदी जी,
                          अब सरकार बनाने को है

मदन मोहन बाहेती'घोटू' 

 May 25, 2014   ghotoo    Leave a comment
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जनाजा -हसरतों का
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      जनाजा -हसरतों का 
 
शून्य पर आउट हुई मायावती जी,
            मुलायम का मुश्किलों से लगा चौका 
सोनिया जी सौ से आधे से भी कम में,
              सिमटी ,ऐसा  नतीजों ने दिया  चौंका 
सोचते थे करेंगे स्कोर अच्छा ,
                सत्ता में दिल्ली की शायद मिले मौका 
और मिल कर बनाएंगे तीसरा एक ,
                 मोर्चा हम,सभी सेक्युलर  दलों का 
रह गए पर टूट कर के सभी सपने ,
                 दे गयी जनता हमें इस बार धोका 
लहर मोदी की चली कुछ इस तरह से ,
                  जनाजा निकला  सभी की हसरतों का

मदन मोहन बाहेती'घोटू' 

 May 25, 2014   ghotoo    Leave a comment
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चुनाव के बाद चिंतन

  चुनाव के बाद का चिंतन -कोंगेस का 
                       १ 
क्या बतलाएं ,हम पर कैसी बीती है 
कल तक भरी हुई गगरी ,अब रीती   है 
हुआ तुषारापात  सभी आशाओं  पर ,
हार गए हम , अबके  जनता  जीती है
                     २ 
सपने सारे मिटे , धूल में,बिखर गए 
नहीं तालियां,मिली गालियां ,जिधर गए   
उड़ते थे स्वच्छंद ,आज हम अक्षम है ,
वोटर  ऐसे  पंख हमारे   क़तर  गए 
                   ३ 
कुछ  कर्मो  के  फल से ,कुछ नादानी में 
ध्वस्त हुए ,मोदी की  तेज सुनामी  में 
बचे खुचे हम,मिल कर आज करें चिंतन ,
डूब गए क्यों ,हम चुल्लू भर पानी में

चुनाव के बाद चिंतन -मुलायम जी का 
           
लहर मोदी की चली ,उड़ गए सब के होश है 
पांच सीटें मिली हमको,जनता का आक्रोश है 
गांधी के परिवार ने पर पायी दो सीटें सिरफ ,
उनसे ढाई गुना है हम,हमको ये संतोष है

घोटू

 May 25, 2014   ghotoo    Leave a comment
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संगत का असर

          संगत का असर

तपाओ आग में तो निखरता है रंग सोने का,
                          मगर तेज़ाब में डालो तो पूरा गल ही जाता है
है मीठा पानी नदियों का,वो जब मिलती समंदर से ,
                           तो फिर हो एकदम  खारा ,बदल वो जल ही जाता है   
असर संगत  दिखाती है,जो जिसके संग रहता है,
                            वो उसके रंग में रंग  धीरे धीरे  ,खिल ही जाता  है 
अलग परिवारों से पति पत्नी होते ,साथ रहने पर,
                            एक सा सोचने का ढंग उनका  मिल ही जाता है

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

 May 24, 2014   ghotoo    Leave a comment
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ब्याह तू करले मेरे लाल

            घोटू  के   पद 
       ब्याह तू करले मेरे लाल

ब्याह तू करले मेरे लाल 
नयी बहू के पग पड़ करते कितनी बार ,निहाल 
होनी थी जो हुई ,मिटा दे ,मन का सभी मलाल 
जनता के भरसक सपोर्ट का,रहा यही जो  हाल 
मोदी की सरकार चलेगी ,अब दस पंद्रह साल 
अपना बैठ ओपोजिशन मे ,बिगड़ जाएगा हाल 
चमचे भी सब  ,मुंह फेरेंगे,देख   समय  की चाल 
मैं बूढी,बीमार  आजकल, तबियत  है   बदहाल 
चाहूँ देखना , हँसता गाता , मै , तेरा   परिवार 
युवाशक्ति बन कर उभरेंगे ,तेरे  बाल  गोपाल 
अपने अच्छे दिन आएंगे ,तब फिर से एकबार 
ब्याह तू,करले मेरे लाल

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

 May 23, 2014   ghotoo    Leave a comment
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सुबह की धूप

          सुबह की धूप

सुबह सुबह की धूप ,धूप कब होती है ,
                       ये है पहला प्यार ,धरा से  सूरज का  
प्रकृति का उपहार बड़ा ये सुन्दर है,
                       खुशियों का संसार,खजाना सेहत का 
   धूप नहीं ये नयी नवेली  दुल्हन है ,
                        नाजुक नाजुक सी कोमल, सहमी ,शरमाती 
उतर क्षितिज की डोली से धीरे धीरे ,
                         अपने  बादल के घूंघट पट को सरकाती 
प्राची के रक्तिम कपोल की लाली है ,
                            उषा का ये प्यारा प्यारा  चुम्बन है 
अंगड़ाई लेती अलसाई किरणों का,
                             बाहुपाश में भर पहला आलिंगन है 
निद्रामग्न निशा का आँचल उड़ जाता,
                              अनुपम उसका रूप झलकने लगता है 
तन मन में भर जाती है नूतन उमंग ,
                              जन जन में ,नवजीवन जगने लगता है 
करने अगवानी नयी नयी इस दुल्हन की,     
                               कलिकाये खिलती ,तितली  है करती  नर्तन 
निकल नीड से पंछी कलरव करते है,
                                बहती शीतल पवन,भ्रमर करते  गुंजन 
 जगती ,जगती ,क्रियाशील होती धरती ,
                                शिथिल पड़ा जीवन हो जाता ,जागृत सा 
सुबह सुबह की धूप ,धूप कब होती है,
                                 ये है पहला प्यार ,धरा पर   सूरज का

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

           कुर्सी

कुर्सियों पर आदमी चढ़ता नहीं है ,
                 कुर्सियां चढ़ बोलती दिमाग पर 
भाई बहन,ताऊ चाचा ,मित्र सारे,
                 रिश्ते नाते ,सभी रखता  ताक पर  
गर्व से करता तिरस्कृत वो सभी को ,
                  बैठने देता न मख्खी   नाक पर 
भूत कुर्सी का चढ़ा है जब उतरता ,
                  आ जाता है अपनी वोऔकात पर     

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

       ग़ज़ल

जो कमीने है,कमीने ही रहेंगे 
दूसरों का चैन ,छीने ही रहेंगे 
कुढ़ते ,औरों की ख़ुशी जो देख उनको,
जलन से आते पसीने ही रहेंगे 
कोई पत्थर समझ कर के फेंक भी दे,
पर नगीने तो नगीने ही रहेंगे 
 आस्था है मन में तो ,काशी है काशी ,
और मदीने तो मदीने ही रहेंगे 
उनमे जब तक ,कुछ कशिश,कुछ बात है ,
हुस्नवाले लगते सीने ही रहेंगे 
 अब तो भँवरे ,तितलियों में ठन गयी है,
कौन रस फूलों का पीने ही रहेंगे 
जितना भी ले सकते हो ले लो मज़ा ,
आम मीठे,थोड़े महीने ही रहेंगे

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

लड़ाई और प्यार

चम्मच से चम्मच टकराते,जब खाने की टेबल पर ,
तो निश्चित ये बात समझ लो,खाना है स्वादिष्ट बना
नज़रों से नज़रें टकराती,तब ही प्यार पनपता है ,
लडे नयन ,तब ही तो कोई ,राँझा कोई हीर बना
एक दूजे को गाली देते ,नेता जब चुनाव लड़ते ,
मतलब पड़ने पर मिल जाते ,लेते है सरकार बना
मियां बीबी भी लड़ते है,लेकिन बाद लड़ाई के,
होता है जब उनका मिलना,देता प्यार मज़ा दुगुना

घोटू

ऐसा भी होता है

चाहते हैं लोग बिस्कुट कुरकुरे,
भले चाय में भिगो कर खाएंगे
कितनी ही सुन्दर हो पेकिंग गिफ्ट की,
मिलते ही रेपर उतारे जाएंगे
पहनती गहने है सजती ,संवरती ,
है हरेक दुल्हन सुहाग रात को,
जबकि होता है उसे मालूम ये,
मिलन में, ये सब उतारे जाएंगे

घोटू

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